महिलाओं ने की वट वृक्ष की पूजा

मलसीसर (रमेश शर्मा)। कस्बे में गुरुवार को महिलाओं ने कई जगह है वटवृक्ष की पूजा अर्चना की। कोरोना काल को देखते हुए महिलाओं की संख्या कम ही दिखाई दी। काफी महिलाओं ने इस बार वट वृक्ष की टहनी, पत्ते घर पर ले जाकर ही पूजा की ताकि बाहर ज्यादा भिड़ ना हो। भारतीय ज्येष्ठ माह की अमावस्या को वट पूजा के रूप में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष पूजा करती है और वट को पानी से सिंचति है।

आधुनिक समय में विज्ञान में यह साबित हो गया है कि पीपल और वट वृक्ष सबसे ज्यादा ऑक्सीजन निर्माण करते है। कितने महान रहे होंगे हमारे पूर्वज जिन्होंने इनकी महत्ता हजारों वर्ष पूर्व ही जान ली थी। गर्मियों के सबसे शुष्क माह बैसाख और ज्येष्ठ में वट और पीपल की पूजा को धर्म से जोडक़र इनको बचाने की कवायद शुरू कर दी थी। इन दो माह में इन पेड़ों को सिंचने मात्र से हजारों पुण्य प्राप्त होने की बात कही गई है।

असल में सनातन धर्म की मूल भावना ही प्रकृति प्रेम से जुड़ी हुई है सनातन धर्म प्रकृति उपासक रहा है। इसमें नदियों, पहाड़ों, पेड़ो सहित हर उस वस्तु को पूजा जाता है जो किसी ना किसी रूप में परिस्थिति तंत्र को मजबूत करती है। मानवीय स्वभाव है कि वो सिर्फ धर्म के नाम से जुड़ीं चीजो को नुकसान पहुंचाने से डरता है इसी को जानते हुए हमारे पूर्वजों ने हर उस वस्तु को धर्म से जोडऩे का प्रयास किया जिससे ये बची रह सके और मानवीय जीवन भी बचा रह सके।

हाल ही में कोरोना की दूसरी लहर में पूरे देश में ऑक्सीजन की कमी से हजारों लोगों ने अपनी जान गवाई। तब हमें समझ आया कि पेड़ हमारे जीवन के लिए कितने उपयोगी है जो बिना किसी भुगतान के हमे जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्रदान करते रहते है।
अत: हम सभी की जिम्मेदारी बनती है कि सनातन धर्म की ओर लौटे और प्रकृति से प्रेम करे। इस मुहिम में युवाओं को आगे आना चाहिये।

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