सेना में भर्ती के नाम पर ठगी करने वाले दो गिरफ्तार

झुंझुनू (जय जांगिड़)। सेना में भर्ती के नाम पर ठगी करने के मामले में नवलगढ़ पुलिस ने अंतर्राज्यीय गिरोह के दो लोगों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी किरणपाल उर्फ किरण सिंह व सौरभ श्रीवास्तव को दिल्ली एनसीआर से गिरफ्तार किया है।

यह था मामला
पुलिस थाना नवलगढ़ में थानाक्षेत्र के नवलडी गांव के निवासी विकास कुमार जाट ने रिपोर्ट पेश की कि कि यूपी के एक व्यक्ति किरण के द्वारा उसको रांची में सेना में भर्ती करवाये जाने का विश्वास दिलाया गया। उसके विश्वास में आकर विकास अपने पांच मित्रों अनिल, रविन्द्र, मनोज, आनन्द, रविन्द्र पुत्र अमीचंद के साथ मार्च में उसके बताये अनुसार संपर्क किया और उसे अलग-अलग माध्यम से 28-29 लाख रूपए उसके बताये अनुसार दे दिए। उसके बाद में उसने एडमिट कार्ड और अपाइंटमेंट लेटर उपलब्ध करवाये परन्तु नौकरी नहीं लगवाई और नौकरी लगाने के नाम पर धोखाधड़ी की।

ऐसे आए पकड़ में
पुलिस ने मामला दर्ज कर अनुसंधान उपनिरीक्षक कंचन के जिम्मे करते हुए ठगों की गिरफ्तारी के लिये थानाधिकारी सुनील शर्मा के द्वारा तत्काल ही टीम का गठन किया जाकर टीम को दिल्ली एनसीआर की ओर उपलब्ध सुराग के आधार पर रवाना किया गया। उक्त टीम के द्वारा तकनीकी आधार पर अनुसंधान करने के बाद सौरभ श्रीवास्तव निवासी शिव विहार, दिल्ली को 2 सितम्बर को गिरफ्तार किया गया। जिसे न्यायालय में पेश किया जाकर आठ दिन का पुलिस रिमाण्ड प्राप्त किया गया। इसके बाद में गठित टीम के द्वारा आगे अनुसंधान और कार्यवाही करते हुए दुबारा दिल्ली से एक और अन्य शातिर ठग किरण पाल उर्फ किरणसिंह निवासी औरंगपुर, मीरपुर यूपी को दिल्ली सेे दस्तयाब कर रविवार को गिरफ्तार किया गया। जिसे भी न्यायालय में पेश किया जाकर रिमांड प्राप्त किया जायेगा।

अनुसंधान मेें सामने आये तथ्य
01. उक्त सौरभ श्रीवास्तव विभिन्न राज्यों के युवाओं से संपर्क करता था और उनको व उनके संपर्क के अन्य बेरोजगार युवाओ को नौकरी दिलवाये जाने का विश्वास दिलाता था।
02. विश्वास में लेने के लिये उन्हे पूर्व के अन्य लोगों को नौकरी दिलवाये जाने के संबंध में उनके नियुक्ति पत्र दिखाता था और अन्य प्रोसेस में चल रहे लोगों के एडमिट कार्ड और मेडिकल के कॉल लैटर दिखाता था व फोन से निरन्तर संपर्क में रह कर नौकरी के लुभावने सपने दिखाये जाकर ब्रेनवाश करता था।
03. जब टारगेट किया गया युवा उन पर पूर्णत: विश्वास कर लेता था तो उसको उसके साथ में अन्य नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को भी पैसे देकर नौकरी लगवाये जाने हेतु विश्वास में लेने के लिये इस्तेमाल करता था और दो से दस -पंद्रह तक के युवाओं को गु्रप तैयार करवाता था।
04. इसके बाद में वह सबको ग्रुपवाईज दिल्ली बुलाया जाकर किसी होटल में डॉक्यूमेंट लेकर बुलाता था और डाक्यूमेंट चैकिंग की कार्यवाही का दिखावा कर प्रथम किश्त प्राप्त कर लेते थे।
05. इसके बाद में दोबारा मेडिकल करवाये जाने के नाम पर दिल्ली या रांची बुलाते थे वहां पर ये उनका फर्जी तरीके से मेडिकल करवाया जाकर उनसे द्वितीय किश्त भी प्राप्त कर लेते थे।
06. इसके बाद में जब बेरोजगार युवा इनसे संपर्क करते थे तो ये कुछ समय लेते रहते थे और प्रक्रिया को तेजी से संपादित करवाने हेतु सैटिंग करवाये जाने के बहाने तीसरी किश्त फिर से प्राप्त कर लेते थे।
07. उक्त पैसे प्राप्त करने के बाद में ये अभ्यर्थीगण को एक एडमिट कार्ड जारी कर देते थे जिस पर सेना की मुहर लगी होती थी। और फर्जी तरीके से परीक्षा में शामिल होने का झांसा देते थे और अभियुक्त को बताते थे कि आप जो पैसे दे रहे हो उसके कारण आपको परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं है आप तो केवल परीक्षा की उपस्थिति पत्रक पर साईन कर दो। परीक्षा में पास हो जाओगे। इस प्रकार अभ्यर्थी को विश्वास दिलाया जाता था कि उसकी परीक्षा निष्पादित हो चुकी है। और इसके साथ में मांगी गयी पूरी धनराशि प्राप्त कर लेते थे।
08. इसके बाद में दिया गया एडमिट कार्ड वापिस अभ्यर्थीगण से प्राप्त किया जाकर सेना में नियुक्तिपत्र व्हाट्सएप के जरिए भेज दिया जाता था।
09. इसके बाद में रांची में एक फर्जी कैंप खोला जाकर अभ्यर्थीगण को ज्वाईन भी करवाने का प्रपंच रचा जाता था।
10. इस फर्जी कैंप पर मिलीट्री इन्टेलीजेन्स का पूर्व में छापा हो चुका है और इस प्रकरण में गिरफ्तार अभियुक्त के रांची में काम करने वाले साथी अभियुक्त रांची में पूर्व में गिरफ्तार हो चुके है।
11. इसके बाद में इन लोगों ने अपने मोबाईल वगैरा बंद कर दिये थे और एक दूसरे से केवल व्हाट्सएप और इंटरनेट कॉलिंग के जरिये ही संपर्क में थे।
12. इस मामले में उच्च स्तर पर तकनीकी अनुसंधान करते हुए मुलजिमान को ट्रेसआउट किया जाकर गिरफ्तार किया गया है।
13. प्रकरण में अनुसंधान जारी है रांची में मिलिट्री इन्टेलीजेंस के द्वारा दर्ज मुकदमें के संबंध में बिहार पुलिस से संपर्क किया जाकर आगे अनुसंधान जारी है।

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