7 जून से खुलेंगी स्कूलें, तीसरी लहर का डर , फिर भी शिक्षा मंत्री करवाएंगे शिक्षकों से नामांकन वृद्धि का कार्य

उच्च शिक्षा में 30 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश, फिर स्कूलों में क्यों नहीं अवकाश

जयपुर (हिन्द ब्यूरो)। राजस्थान में सोमवार से सरकारी और निजी स्कूल खोलने के लिए शिक्षा मंत्री के निर्देश पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने आदेश तो जारी कर दिए हैं, लेकिन इस आदेश से सैकड़ों थर्ड ग्रेड और सेकंड ग्रेड के शिक्षकों की जान कोरोना संक्रमण के कारण खतरे में पड़ चुकी है।

प्रदेश के अरस्तु शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रामकृष्ण अग्रवाल का कहना है कि कोरोना मरीजों के आंकड़े जरूर कम हुए हैं। लेकिन कोरोना संक्रमण का खतरा अभी टला नहीं है। इस कारण मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को 30 जून तक ग्रीष्म अवकाश बढ़ा देना चाहिए। उसके बाद ही स्कूल खोलने और शिक्षकों को स्कूलों में बुलाने का आदेश जारी करना चाहिए।

प्रदेश में छाए कोरोना संकट की वजह से सरकार ने 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं को रद्द करके बच्चों को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया है। इसी के साथ अब प्रदेश की स्कूलों में 7 जून से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो जाएगा।

हालांकि, स्कूल सत्र को लेकर गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि फिलहाल बच्चों के स्कूल नहीं खोले जाएंगे।
हालात सामान्य होने के बाद ही बच्चों को बुलाने पर फैसला लिया जाएगा।

शिक्षामंत्री ने शिक्षकों को लेकर कही ये बात

शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि अभी राज्य में पूरी तरह से अनलॉक नहीं हुआ है। *जिस हिसाब से लॉकडाउन प्रतिशत खुलेगा, उसी के अनुसार स्कूल में टीचर बुलाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि जब तक पूरी तरह से स्थिति सामान्य नहीं हो जाती तब तक कोई भी शाला प्रधान शिक्षकों को स्कूल में बुलाने के लिए बाध्य नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा कि कई ऐसे टीचर है जो दूसरे जिलों से आते हैं।

हालांकि, दूसरी ओर राज्य के करीब 3:30 लाख शिक्षकों का दबी जुबान में कहना है कि जब कोरोना की तीसरी लहर का अभी से डर तेज़ हो गया है, तो स्कूले खोलने की क्या जरूरत है।

जबकि, दूसरी ओर राज्य के 2 शिक्षा विभाग यानी स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा के नियमों में भी अंतर स्पष्ट नज़र आ रहा है।

एक और उच्च शिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी ने कोरोना के भयानक संक्रमण को देखते हुए 30 जून तक समस्त कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ग्रीष्म अवकाश घोषित कर दिया था।

वहीं, दूसरी ओर स्कूली शिक्षा के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा कोरोना वायरस की दूसरी लहर की भयानकता के बावजूद और तीसरी लहर के आने के संकेत के बावजूद भी अपनी जिद पर अड़े हुए हैं।

उन्होंने 30 जून तक शिक्षकों के ग्रीष्मावकाश बढ़ाने के स्थान पर 7 जून से ही स्कूलों को खोलने का आदेश माध्यमिक शिक्षा निदेशक को दे दिया था। जिसके तहत सोमवार से प्रदेश में स्कूल खुलने जा रहे हैं।

शिक्षा मंत्री की ज़िद के कारण प्रदेश के सैकड़ों शिक्षकों व अभिभावकों के जहन में एक सवाल उठ रहा है।

1 . उच्च शिक्षा में 30 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित है। तो स्कूलों में क्यों नहीं अवकाश।

2 . 7 जून से ये स्कूल खोल रहे है, तो शिक्षकों को घर घर जाकर नामांकन वृद्धि के लिए कच्ची बस्तियों में भेजा जाएगा। इस बार वैसे ही कोरोना का घातक रूप है, यदि कोई शिक्षक बस्ती के लोगों से कोरोना संक्रमित हो गया, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा।

3 . नामांकन वृद्धि अभियान के बावजूद भी इस बार तीसरी लहर के अत्यधिक घातक होने की सूचना के तहत राज्य में स्कूल नहीं खोलने के मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री के ही आदेश है,पहले से ही, तो फिर नामांकन वृद्धि अभियान की जरूरत कहा महसूस हो रही है।

4 . राज्य सरकार व शिक्षा मंत्री जान बूझकर क्यों शिक्षकों को कोरोना संक्रमित कच्ची बस्तियों व कॉलोनियों में नामांकन वृद्धि के लिए भेजने को उत्साहित हो रहे है।

शिक्षा मंत्री की 2 जून की बैठक में किया गया था फैसला

गौरतलब है कि राजस्थान में कोरोना के चलते 2 जून को हुई बैठक में 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं नहीं कराने का फैसला लिया गया था।

इसके बाद डोटासरा ने कहा था कि जल्दी ही नई शिक्षा नीति के तहत विभाग के कर्मचारी मूल्याकंन नीति के तहत रिजल्ट तैयार करेंगे।

उन्होंने बताया था कि अगर कोई छात्र फार्मूले के मार्क्स से संतुष्ठ नहीं होता है तो स्थिति सामान्य होनें के बाद उन्हें परीक्षा देने का मौका दिया जाएगा।

स्कूल में नहीं आएंगे फिलहाल बच्चे

शिक्षामंत्री ने कहा कि जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते तब तक स्कूलों में छात्रों को नहीं बुलाया जाएगा।

स्कूल में केवल 50 फीसदी स्टाफ ही आएगा। उन्होंने कहा कि जैसे ही 10 जून से प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन शुरू होगा। तब सभी शिक्षक मुख्यालय पर पहुंच जाएंगे। तब तक कोई भी शाला प्रधान स्कूल आने के लिए शिक्षकों को बाध्य नहीं करेगा।

छात्रों को घर पर रहते हुए वैकल्पिक तौर पर पढाने का कार्य शुरू किया जाएगा।
इसके तहत आओ घर से सीखें अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए बच्चों को ऑनलाइन और व्हाट्सअप ग्रुप के जरिए पढ़ाया जाएगा।

You might also like