खून से खून का रिश्ता बनाने का अनुपम माध्यम है प्लाज़्मा डोनेशन : धीरज गुप्ता

कोटा (योगेश जोशी)। इस भौतिकवादी युग मे कई ऐसे विरले ही होते है जिनके कदम जीवन के हर एक मोड़ पर जनहितकारी होते है। कोरोनाकाल के इन संकटकालीन समय मे ऐसे कई उदाहरण देखने को मिले। कोरोना लगभग अब अपने पैर समेट रहा है किंतु अभी भी अस्पताल के बेड पर इस संकट को झेल रहे लोगो के लिये प्लाज़्मा जीवनद्रव्य बना हुवा है। जानकारी के अनुसार औसतन रोज़ एक मरीज को प्लाज़्मा की ज़रूरत हो रही है जिसके लिए कुछ स्वम सेवी संस्थाये अभी भी अपना पूर्ण समर्पण देकर मदद के करवा को आगे बढ़ा रही है। ऐसे वक्त में वो डोनर जो पूर्व में प्लाज़्मा का दान कर चुके है, ऐसी ज़रुरत को अवसर मानकर तुरंत एम बी एस पहुँचते है और पूर्ण ज़ज़्बे प्लाज़्मा का दान करते हैं। आज भी सेवा का ऐसा ज़ज़्बा पुनः देखने को मिला जब टीम जीवनदाता की प्रेरणा से पाँच बार प्लाज़्मा का दान करने के बाद कोटा जंक्शन भगतसिंह कॉलोनी निवासी धीरज गुप्ता तेज़ (49 वर्ष) छठवीं बार प्लाज़्मा का दान करने पहुँचे। हुवा यू कि चित्तौड़गढ़ से आये एक व्यक्ति को कोरोना हो गया और मेडिकल कॉलेज में भर्ती इस मरीज को ऐ पॉज़िटिव प्लाज़्मा की ज़रूरत पड़ी। लायंस क्लब के जोन चैयरमैन व टीम जीवनदाता के संयोजक भुवनेश गुप्ता बताते है कि इस मरीज के कोटा में कोई जान पहचान नही थी। इस तरह बूंदी के एक मीडियाकर्मी संदीप व्यास की माता मेडिकल कॉलेज में भर्ती रुकमणी दाधिच (74) को व चित्तौड़गढ़ निवासी मनोज शर्मा(45) को  प्लाज़्मा लिखा गया और व्यवस्था हेतु तीमारदार डोनर के लिये परेशान नज़र आये।
टीम से जुड़े धीरज गुप्ता ने पूर्व में ही स्पष्ठ कर दिया था कि जब तक एंटीबॉडी है तब तक लगातार प्लाज़्मा डोनेट करेंगें। इसी भाव से उन्होनें अविलंब टीम की चर्चा के साथ ही एमबीएस पहुँचकर छठवीं बार प्लाज़्मा दिया। रेलवे सलाहकार समिति के सदस्य और पत्रकारिता संगठन ज़ार से जुड़े धीरज का कहना है कि इस बार बहुत आत्मिय सुख प्रदान करने वाला संयोग रहा।  जिनके लिए वे प्लाज़्मा दे रहे है वे उनकी भाई तुल्य है क्योंकि चित्तौड़गढ़ उनकी जन्मस्थली है । और दूसरे मरीज के तीमारदार के साथ मीडिया में सहकर्मी के रूप में कार्य कर चुके है, सो वो भी उनकी माता के समान है। उनका यह भी कहना है कि अब तक बारह मरीज़ो को उनके द्वारा डोनेट किया गया प्लाज्मा चढ़ चुका है , जिससे वास्तव में खून से खून का अनुपम रिश्ता बन गया है, वह सुख कल्पना के परे है। इस कार्य मे नीतिन मेहता, एडवोकेट महिन्द्रा वर्मा व मनीष माहेश्वरी का पूर्ण सहयोग रहा।
अंतिम मरीज तक ज़ारी रहेगा टीम जीवनदाता का जीवनदायिनी सफऱ
भुवनेश गुप्ता बताते है टीम जीवनदाता का प्रयास अंतिम मरीज को मदद दिलवाने के लिए रहेगा। इसके लिये मेडिकल कॉलेज में हर स्टाफ़ व ब्लड बैंक में सभी को प्रत्यक्ष व सोशल मीडिया के माध्यम से अवगत करवाया है कि अगर कोई परेशांन है तो उनके लिए टीम सदस्य सदैव चौबीसों घंटे खड़े रहेंगी। हेल्पलाइन नंबर 9414000800 जारी कर टीम सदस्य से कभी भी संपर्क कर प्लाज़्मा के लिये मदद ली जा सकती है।
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