धार्मिक मान्यतों के अनुसार हर पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि महत्वपूर्ण होती है. लेकिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली कामदा एकादशी अपने फल के कारण विशेष महत्वपूर्ण मानी जाती है. एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. इस साल कामदा एकादशी 08 अप्रैल को मनाई जाएगी.

मान्यताओं के अनुसार इस एकादशी का व्रत करने वाले साधक के सभी पाप नष्ट होते हैं और उसकी हर कामना पूरी होती है व जीवन में सुख समृद्धि आती है. इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है व कई लोग इस दिन श्रीहरि को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय भी करते हैं. इसके अलावा माना जाता है कि अगर कामदा एकादशी पर अगर व्यक्ति कुछ मंत्रों का जप कर ले तो भी उसे विशेष फल प्राप्त हो सकते है और उस पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का कृपा प्राप्त हो सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं पंडित रमाकांत मिश्रा से उन खास मंत्रों के बारे में, जो कि एकादशी के दिन करना शुभ फलों को प्रदान करता है.

कामदा एकादशी मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 7 अप्रैल को रात 08 बजकर 00 मिनट पर शुरू होगी और 8 अप्रैल को रात 09 बजकर 11 मिनट पर खत्म होगी. साथ ही व्रत पारण का समय 8 अप्रैल की सुबह 06 बजकर 05 मिनट से 08 बजकर 36 मिनट तक रहेगा. जबकि द्वादशी तिथि रात 10 बजकर 54 मिनट तक रहेगी.

भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के मंत्र
एकादश्यां समायुक्ते देवदेव जनार्दन। एकभक्तिं प्रदास्यन्ति मुक्तिं मे कुरु केशव
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ विष्णवे नमः
ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्
ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः

इन मंत्रों के जाप से मिलेगी सुख-शांति
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्
ॐ नमस्ते परमं ब्रह्मा नमस्ते परमात्ने। निर्गुणाय नमस्तुभ्यं सदुयाय नमो नम:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात्
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लंबोदराय सकलाय जगद्धितायं
श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा
ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नमः

इन मंत्रों के जाप से प्रसन्न होंगी मां लक्ष्मी
– ॐ श्रीं ह्रीं पूर्ण गृहस्थ सुख सिद्धये ह्रीं श्रीं ॐ नमः
– ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नमः
– ऊँ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये, धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा