26 सप्ताह के 800 ग्राम के नवजात को मिला नवजीवन

कोटा (योगेश जोशी)। जन्मजात विकृति एवं समय से पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों के उपचार में आब कोटा में नित नए प्रयोग व अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ उपचार किया जा रहा है। ऐसे में तलवंडी स्थित सुधा अस्पताल में 26 सप्ताह के 800 ग्राम वजनी बच्चे को बचाया गया है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमराज सोनी ने बताया कि अत्यंत ही प्रीमेच्योर नवजात शिशु को सफलतापूर्वक सुधा हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया गया है। बूंदी निवासी 30 वर्षीय गर्भवती महिला को अत्यंत गंभीर अवस्था में एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था। वहां इमरजेंसी में एलएससीएस आॅपरेशन किया गया, क्योंकि महिला को लगातार मिर्गी के दौरे आ रहे थे, ऐसे में मां व बच्चें की जान बचाना आवश्यक था। आॅपरेशन के बाद 26 सप्ताह के नवजात बच्चे ने जन्म लिया, जिसका वजन केवल 800 ग्राम था, उसे सुधा अस्पताल लाया गया और यहां  उसको तुरंत मशीन द्वारा श्वास दिया गया। बच्चें को श्वास लेने में काफी परेशानी आ रही थी। प्रीमेच्योर नवजात शिशु के फेफड़े अविकसित होने होते हैं, इसके लिए उनको फेफड़ों में प्रेशर दिया जाता है, ताकी फैफडे सिकुडे नहीं। बच्चें को सीपीएपी और एचएफएनसी जैसी मशीनों पर रखा गया। इंफेक्शन की रोकथाम के लिए उपयुक्त एंटीबायोटिक्स दी गई। बीपी लो होने के कारण उस पर निरंतर मोनिटरिंग रखी गई।

52 दिन के अथक प्रयास से बचाया गया नवजात
डॉ. हेमराज सोनी ने बताया कि शिशु की नाल में नलची डालकर बीपी की मोनिटरिंग की गई। बच्चें का बीपी कम आ रहा था। बच्चें में धीरे-धीर सुधार आने पर बहुत ही अल्प मात्रा में दूध चालू किया गया और धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाई गई। आॅक्सीजन केवल 2 दिन देनी पड़ी। बच्चे के दिमाग, हार्ट और आंखों में कोई विकार नहीं हुआ। 52 दिन के अत्यंत संघर्षपूर्ण समय के बाद नवजात अब 1 किलो 65 ग्राम का हो गया है। इस नवजात को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। इस नवजात को करीब दो माह तक अस्पताल में गहन चिकित्सा इकाई में रखा गया और हर समय इस पर निगरानी रखते हुए अत्याधुनिक तकनीक के साथ विशेषज्ञों की टीम ने नवजात के जीवन को बचाया है। बच्चें को स्वस्थ्स देखकर सुधा हॉस्पिटल में काफी खुशी का माहौल रहा और सभी ने प्रसन्नता जाहिर की है। सुधा अस्पताल के निदेशक व ह्दय रोग विशेषज्ञ डॉ. पलकेश अग्रवाल ने बताया कि सुधा अस्पताल में निरंतर जटिल सर्जरी कर मरीजों को बेहतरीन उपचार मिल रहा है। हाड़ौती संभाग में इस तरह की जटिल सर्जरी सुधा अस्पताल में की जा रही है। ऐसे में मरीज को अब बडेÞ शहरों की ओर रुख करने की आवश्यकता नहीं है।

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