प्रदेश के 2 करोड़ से अधिक अभिभावकों को झटका कोरोना काल की देनी होगी फ़ीस

जयपुर (जितेंद्र रावत)। प्रदेश के लाखों अभिभावकों को सोमवार को आर्थिक आधार पर बड़ा झटका उस वक्त लगा,जब अभिभावकों को कोरोनाकाल की पूरी फीस देने का आदेश जारी हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है। जिसमें अभिभावकों को ट्यूशन फीस का 70 प्रतिशत राशि ही देने के आदेश जारी हुए थे। जस्टिस एएम खानविलकर व जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की बैंच ने लगाई रोक लगाई है। आदेश के बाद अब अभिभावकों को साल 2019-20 में तय फीस के हिसाब से ही पूरी फीस देनी होगी। सुप्रीम कोर्ट आदेश के तहत अब फीस की राशि 6 किस्तों में अभिभावक चुका सकेंगे।

इसके अनुसार अभिभावकों को 5 मार्च को पहली किस्त देनी होगी। भारतीय विद्या भवन, एसएमएस व अन्य स्कूलों की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिए है।उच्च न्यायालय के आदेश से प्रदेश के 2 करोड़ से अधिक अभिभावकों में भारी रोष व्याप्त हो गया है। अभिभावकों ने बताया कि केवल एक मत के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश दे दिए। संयुक्त अभिभावक संघ के प्रवक्ता अभिषेक ने बताया कि संघ प्रत्येक अभिभावक के लिए वचनबद्ध और प्रतिबद्ध है, जो भी कानूनी प्रक्रिया शेष है उन सभी का उपयोग किया जाएगा। अगर कोर्ट में पीआईएल भी लगानी पड़ी तो वह भी लगाई जाएगी अभिभावकों को ऐसे आदेश की आशा ही नही थी। उच्च न्यायालय ने केवल स्कूलों के साथ न्याय कर प्रदेश के 2 करोड़ अभिभावकों के साथ अन्याय किया है।

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