मिक्सोपैथी थल सैनिक को रफाल पकड़ाने जैसा: डा. महेश शर्मा

चिकित्सकों ने काली पट्टी बांध काम करके जताया विरोध

चूरू(पीयूष शर्मा). चिकित्सा क्षेत्र में मिक्सोपैथी, क्रोसपैथी व ब्रिज कोर्स के प्रावधानों के विरोध व राज्य में इसको लागू नहीं करने की मांग को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर निजी व सरकारी चिकित्सकों ने शुक्रवार को आंशिक कार्य बहिष्कार करते हुए काली पट्टी बांधकर काम किया।

सुबह नौ बजे से केवल आपातकालीन व कोविड-19 के मरीजों का ही उपचार किया। बाद में चिकित्सकों के प्रतिनिधिमंडल ने कलक्टर डा. प्रदीप के. गावंडे को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान आईएमए चूरू के अध्यक्ष डा. बीएल नायक ने कहा कि गत आठ दिसंबर के आईएमए के निणर्यानुसार आज चिकित्सकों ने कार्य का बहिष्कार किया है। ताकि उक्त प्रावधानों से आमजन को होने वाले नुकसान से बचाया व सरकार का ध्यान आकर्षित किया जा सके।

यदि सरकार ने चिकित्सकों की मांग की अनदेखी की तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। आईएम चूरू के संगठन सचिव डा. महेश शर्मा ने बताया कि उक्त प्रावधानों से सभी पद्धतियों का स्वतंत्र विकास प्रभावित होगा और इस आदेश में एक आयुर्वेदिक चिकित्सक को दो वर्ष कोर्स के बाद जनरल सर्जरी, नाक कान गला, नेत्र, दंत सर्जरी व अन्य कुल 58 तरह के आपरेशन करने हेतु अधिकृत करना उचित नहीं है। ये आमजन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है।

जबकि वर्तमान आधुनिक चिकित्सा पद्धति में विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग विशेषज्ञ होना आवश्यक है। इस राजपत्र में स्पष्ट उल्लेखित ही नहीं है कि प्रिएनेस्थेटिक, एनेस्थेटिक व पोस्ट ऑपरेटिव पीरियड में वो किस पद्धति की दवाइयां उपयोग में लेंगे। यह मिक्सोपैथी की ओर बढ़ाया गया बहुत ही गंभीर कदम है।

ये कार्य एक थल सैनिक को रफाल पकड़ाने जैसा है। अत: इस आदेश को वापस लेना ही पड़ेगा। नहीं तो आधुनिक चिकित्सा पद्धिति के चिकित्सकों को आंदोलन का रास्ता पकडऩा पड़ेगा। इस मौके पर भरतिया अस्पताल के उप नियंत्रक डा. मनोज शर्मा, डा. जेपी महायच, डा. प्रदीप शर्मा, डा. अमजद खां, डा. रामनिवास ढुकिया, डा. अभिनव सरीन, डा. हिमत्ता राम, डा. सुरेंद्र सिंह आदि चिकित्सक मौजूद थे।

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