केसीएसएफ श्रमिक संगठन ने दस सुत्री मांगों को लेकर दिया ज्ञापन

खेतड़ी नगर (विपुल पारीक)। खेतड़ी कॉपर श्रमिक फ्रंट श्रमिक संगठन के महामंत्री राजकुमार बाडेटिया ने सासंद नरेंद्र खीचड़ को खान मंत्री के नाम केसीसी कर्मचारियों की दस सुत्री मांग पत्र सौपा।

जिसमें कर्मचारियों के वेतन समझौते को लागु करने, पिछले वेज रिवीजन का बकाया एरियर का भुगतान एक मुश्त करने, नवंबर 2017 से लम्बित वेतन समझौते की वार्ता चालू करवाने, वर्ष 2017 के बाद सेवानिवृत हुए कर्मचारियों को ग्रेच्युटी की राशि बीस लाख दिलवाने, केसीसी अस्पताल में चल रही चिकित्सकों की कमी को होम्योपैथी, आयुर्वेद या युनानी चिकित्सकों की भर्ती कर पूर्ति करने, केसीसी टाऊनशिप में पानी की सप्लाई रोजाना, पानी की सप्लाई सुचारू रूप तक नहीं की जाती तब तक प्रत्येक कर्मचारी को पानी भत्ता देने, कुंभाराम लिफ्ट परियोजना के पानी की आपूर्ति को बढ़वाने की मांग की।

इसी प्रकारी कम्पनी ने कर्मचारियों को सन् 1964-65 में बने आवासीय क्वार्टर आवंटित किए हुए हैं, इन क्वार्टर की हालत जर्जर हो चुकी है, लंबे समय से मरम्मत नहीं हुई है। सभी कर्मचारियों से अनुलाभ के नाम पर 12.5% टैक्स वसूला जाता है। जबकि जनसंख्या घनत्व के अनुसार 2.5 प्रतिशत अनुलाभ कर लगना चाहिए। अतः जनसंख्या घनत्व के आधार पर अनुलाभ कर की राशि को ढाई प्रतिशत करवाने व आवासीय क्वार्टर की मरम्मत, केसीसी प्रबंधन मान्यता प्राप्त यूनियन केटीएसएस के साथ मिलकर जीनियस कंपनी के मार्फत कर्मचारियों की भर्ती कर रहा है जिससे कर्मचारियों की पदोन्नति में बाधा आ रही है।

अतः जीनियस कम्पनी के मार्फत की जाने वाली भर्ती को बंद करने व कर्मचारियों की नियमित पदोन्नति, केसीसी के कर्मचारियों की डीपीसी लंबे समय से नहीं करवाई गई है, अपने पद से उच्च ग्रेड का कार्य कर रहे कर्मचारियों को पूर्व की भांति मिलने वाली अथोराईजेशन की राशी को पुनः चालू, कम्पनी के मृतक कर्मचारी के आश्रितों को पूर्व की भांति अनुकम्पा के आधार पर नौकरी देने, प्रोजेक्ट में स्थाई कामगारों की भर्ती, केसीसी में ठेका प्रथा बंद करके स्थाई कामगारों की भर्ती, केसीसी में वर्ष 1996 के बाद कोई स्थाई भर्ती नही हुई। वर्तमान में केसीसी में 2250 ठेका कर्मी कार्यरत हैं।

इन कामगारों को न्यूनतम वेतन ही दिया जाता है। ठेका कंपनी या ठेकेदार द्वारा अन्य सुविधाएं नहीं दी जाती है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2016 में समान काम समान वेतन देने का फैसला दिया था। केसीसी से सेवानिवृत कर्मचारियों को मकान लीज पर देते समय गारंटर की बाध्यता को समाप्त करने, केसीसी की खदानों का विकास, प्लांट से उत्पादन चालू करने के लिए हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड को बजटरी सहायता उचित मात्रा में दिलवाने की मांग की।

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