शिक्षा महकमे की अनदेखी: मानदेय को तरस रहे दो हजार 900 कुक कम हेल्पर

अधरझूल में है राज्य सरकार के आदेश

चूरू (पीयूष शर्मा). शिक्षा महकमे के हाकिमों की अनदेखी अल्प मानदेय पर काम कर रहे दो हजार 900 कुक कम हैल्पर के निवाले पर भारी पड़ रही है।

क्योंकि स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन बनाने वाले कुक कम हैल्पर को एक साल से मानदेय नहीं मिला है। गौरतलब है कि जिले के राजकीय विद्यालयों में काम कर रहे करीब दो हजार 900 कुक कम हेल्पर्स पोषाहार बनाते हैं। कोरोना महामारी के कारण विद्यालय बन्द होने से पिछले 12 माह से आर्थिक तंगी को झेलते हुए मानदेय को तरस रहे हैं। मात्र 1320 रुपए प्रतिमाह में काम करने वाले इन कुक कम हैल्पर्स के लिए राज्य सरकार ने एक जनवरी 2021 को आदेश जारी कर स्पष्ट किया कि राजकीय विद्यालयों में सभी कुक कम हेपल्पर्स को मार्च 2020 से वर्तमान सत्र तक के मानदेय का भुगतान किया जाएगा। इसके लिए मिड डे मील आयुक्त ने बजट भी जारी कर दिया। कोरोना के चलते लगे लोकडाउन के बाद से अधिकारियों की उदासीनता के कारण अभी तक कुक कम हेल्पर्स को उनके मानदेय का भुगतान नहीं हो पाया है। ऐसे में इन्हें अपना घर खर्च चलाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बेहद कम है कुक कम हैल्पर का मानदेय

बता दें कि सरकार की ओर से कुक कम हेल्पर को बेहद कम राशि मानदेय के रूप में दी जाती है। इतनी कम राशि में वैसे ही महिलाओं के लिए घर का खर्च चलाना बड़ा मुश्किल होता है। मगर गत 14 मार्च 2020 के बाद से इन्हें मानदेय ही नहीं मिला। सरकारी स्कूल में पोषाहार पकाने वाली कुक कम हेल्पर महिलाओं को सरकार की ओर से मानदेय के रूप में 1320 रुपए प्रतिमाह दिया जाता है। गत 12 महीने से यह राशि भी नहीं दी गई है। सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में मिड डे मील योजना के तहत 50 बच्चों पर एक और 100 बच्चों पर दो कुक कम हेल्पर महिलाओं को लगाया जाता है। मिड डे मील योजना के तहत भोजन पकाने के लिए संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की गई है। बल्कि केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार स्कूलों में पोषाहार पकाने के लिए वर्ष 2010 से कुक कम हेल्पर की सेवाएं मानदेय के आधार ली जा रही हैं।

इनका कहना है

कुक कम हेल्पर्स के लिये कोरोना काल के मानदेय भुगतान के आदेश जारी कर राज्य सरकार ने मानवीय संवेदनाओं को समझा है। मगर बजट उपलब्ध होते हुए भी अधिकारियों की उदासीनता के कारण अब तक मानदेय भुगतान नहीं होना न्यायोचित नहीं है। जिले के सभी कुक कम हेल्पर्स को मानदेय का शीघ्र भुगतान होना चाहिए।

रामावतार पबरी, जिलाध्यक्ष
शिक्षक संघ एलिमेंट्री सैकंडरी टीचर एसोसिएशन(रेसटा) चूरू

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