विश्व इन्सुलिन दिवस पर डिजिटल बैठक

कोटा  (योगेश जोशी)। कोटा में स्थित राजस्थान के एक मात्र आर एस इस डी आई सेंटर ऑफ एक्सीलैंस  इन टाइप 1 डायबिटीज़ केयर ” रामचंदानी डायबिटिक केअर ऐंड रिसर्च सेन्टर” की ओर से राजस्थान के ग्रामीण इलाकों और कस्बों में टाइप वन डायबिटिक बच्चों के  लिए एक विशेष अभियान  चलाया जाएगा। इस अभियान की रूपरेखा पर चर्चा करने और सबके सुझाव शामिल करने के लिए मंगलवार को विश्व इन्सुलिन दिवस पर डिजिटल बैठक का आयोजन किया गया । आर एस इस डी आई राजस्थान चैप्टर के अद्यक्ष डॉ के के पारीक ने बताया कि “रामचंदानी डायबिटिक केअर ऐंड रिसर्च सेन्टर” विगत 15 वर्ष से इस दिशा में कार्य कर रहा है ,जिसके तहत आज की तिथि में 300 टाइप वन डायबिटिक बच्चों को निशुल्क इंसुलिन इंजेक्शन, ग्लूकोमीटर, गलूकोस्ट्रिप्स और मेडिकल सलाह प्रदान की जा रही है। इसी कारण  राष्ट्रीय आर एस इस डी आई ने पूरे भारत में टाइप 1 डायबिटीज़  के लिए एक टाइप 1 डायबिटीज़ टास्क फोर्स बनाई है जिसमे राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ बंशी साबू ने बताया कि देश में 40  केंद्रो में राजस्थान में इस सेन्टर को सेंटर ऑफ एक्सीलैंस  टाइप 1 डायबिटीज़ केयर  घोषित किया है ।
आर एस इस डी आई राजस्थान चैप्टर वाईस चैयरमैन डॉ गिरीश माथुर ने बताया कि राजस्थान में टाइप वन डायबिटिक केअर  को  यह समन्वित प्रयास  गति देगा।उन्होंने बताया कि पूरे विश्व में सबसे ज्यादा टाइप वन डायबिटिक  बच्चे भारत में हैं,जिनकी अनुमानित संख्या एक लाख अस्सी हजार है । आर एस इस डी आई का एक मात्र मकसद है कि टाइप वन डायबिटिक में इंसुलिन की कमी से, जानकारी के अभाव में, ग्लूकोमीटर एवम् ग्लूकोस्ट्रिप्स की कमी से  किसी भी बच्चे की मृत्यु ना हो । रामचंदानी डायबिटिक केअर ऐंड रिसर्च सेन्टर के निदेशक डॉ जी डी रामचंदानी ने बताया कि इन्सुलिन की खोज को इस वर्ष सौ साल हो गए परन्तु अभी भी मधुमेह टाइप वन से कई बच्चों की  इंसुलिन की कमी की वज़ह मौत हो रही है । उन्होंने कहा कि एक साल के इस विशेष अभियान के तहत सौ चिकित्सकों, सौ एजुकेटर्स को टाइप वन डायबिटिक  की केअर ,उन्हें इन्सुलिन इंजेक्शन लगाने की विधि, शुगर बहुत कम एवम् बहुत ज्यादा होने की स्तिथि  की जानकारी,  इंसुलिन इंफयूजन पम्प का इस्तेमाल करने, टाइप वन डायबिटिक के आहार और मनोचिकित्सकीय देखभाल का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ।
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