ओजोन परत के क्षरण के प्रभाव व बचाव पर किया मंथन

चूरू। राजकीय लोहिया महाविद्यालय की ओर से शुक्रवार को सेमीनार का आयोजन कर ओजोन परत के क्षरण के प्रभाव व बचाव पर मंथन किया गया।
प्राचार्य प्रो. दिलीप सिंह पूनियां की अध्यक्षता में आयोजित सेमीनार की मुख्य अतिथि उप वन सरंक्षक डॉ. सविता दहिया थी। प्रारम्भ में सेमीनार के संयोजक एवं वनस्पतिशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ. शेर मोहम्मद ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि पृथ्वी का अस्तित्व बचाना है और पर्यावरण में सुधार लाना है तो हमें हर हाल में पौधों की कटाई को रोकना होगा। पृथ्वी पर सजीव सृष्टि के निर्माण से लेकर आज तक वायुमण्डल में उपस्थित ओजोन गेस एक छतरी के तरह सूर्य से आने वाली हानिकारक पैराबेंगनी कीरणों से जीवों की रक्षा करती आ रही है। यहीं कारण है कि पृथ्वी के ओजोन परत में छेद होने से समस्त विश्व में चिंता व्याप्त है। उप वन संरक्षक डॉ. सविता दहिया ने कहा कि धरती की आबोहवा एक खतरनाक मोड़ पर खड़ी है। इसका बदलता रुख पृथ्वी के विनाश का कारण बन सकता है। भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एम. एम. शेख एवं प्राणिशास्त्र विभाग के वरिष्ठ सह आचार्य डॉ. के. सी. सोनी ने बताया कि ओजोन की सान्द्रता को निश्चित करने में लगभग 50 रासायनिक क्रियाएं होती हैं। इन क्रियाओं में मुख्य रूप से रसायन क्लोरोफ्लोरो कार्बन यौगिक एवं नाइट्रस ऑक्साइड शामिल हैं। डॉ. दहिया ने वनविभाग द्वारा वृक्षारोपण से सम्बन्धित चलाये जा रहे कार्यक्रम के बारे में भी विस्तार से बताया। प्राचार्य प्रो. दिलीप सिंह पूनियां ने ओजोन दिवस की महता को विस्तार से रेखांकित करने के साथ ही प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी का आह्वान किया। प्रो. महावीर सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। वनस्पतिशास्त्र विभाग के सह आचार्य डॉ. प्रशान्त कुमार शर्मा ने आभार जताया। कार्यक्रम में स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं के विद्यार्थियों के अतिरिक्त समस्त संकाय सदस्य उपस्थित थे। संचालन छात्रा अन्नपूर्णा सुथार ने किया।

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